देवास। जिले में खिवनी वन्य प्राणी अभयारण्य से खुशखबरी आई है। अभयारण्य में बाघिन मीरा ने तीन शावक को जन्म दिया है। तीनों शावक कैमरे में कैद हुए हैं। इससे बाघिन मीरा व बाघ युवराज का कुनबा बढ़ गया है। यह अभयारण्य के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभयारण्य में लगे ट्रैप कैमरे में तीन नन्हें शावक शिकार खाते दिखाई दे रहे हैं। मीरा कई महीनों से काफी सतर्क थी, यानी वह लगातार शावकों की सुरक्षा के लिए पल-पल निगरानी कर रही है। अब शावक शिकार खाने लगे हैं। हाल में ही अभयारण्य प्रबंधन को उस समय खुश खबरी मिली जब पानी के एक स्त्रोत के पास बाघिन दिन में शावकों के साथ दिखाई दी। इसके बाद रात के समय बाघ और बाघिन तीनों शावकों के साथ जल स्त्रोत पर ट्रेप कैमरे में दिखाई दिए। अभयारण्य अधीक्षक विकास माहोरे ने बताया कि अभयारण्य में 6 बाघों की उपस्थिति पूर्व से है और अब नए मेहमानों के आने के बाद प्रबंधन इनकी विशेष रूप से निगरानी कर रहा है। तीनों शावक स्वस्थ हैं और बाघिन के साथ ही अभयारण्य में विचरण कर रहे हैं। लगातार बाघिन के साथ रहने और ट्रेप कैमरों में काफी करीब नहीं आने के चलते प्रबंधन को अभी तक तीनों शावकों के लिंग का पता नहीं चला है। जिले के अंतिम छोर पर स्थित 134.77 वर्ग किलोमीटर में फैले अभयारण्य में भारत के राष्ट्रीय पशु एवं टाइगर स्टेट के घोतक बाघ का प्राकृतिक आवास है। यहां तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, लोमड़ी, चीतल, नीलगाय, चौसिंगा, जंगली सुअर जैसे कई वन्यप्राणी प्राकृतिक आवास में रह रहे हैं। अभयारण्य अधीक्षक विकास माहोरे ने बताया कि वर्ष 1955 में जारी प्रथम अधिसूचना के अनुसार यह मध्य प्रदेश का प्रथम अधिसूचित अभयारण्य है। ग्रीष्म ऋतु चल रही है, ऐसे में वन्यप्राणी भी गर्मी से राहत ढूंढ रहे हैं। रविवार को खिवनी अभ्यारण में बाघ गर्मी में रास्ते पर नजर आया तथा निर्भीक होकर बैठा रहा। अधीक्षक विकास माहोरे और उनके अमले को गश्ती के दौरान जंगल में यह नजारा दिखाई दिया। वन क्षेत्र बड़ा होने एवं पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आने वाले पर्यटकों को कभी-कभी ही जंगल में बाघ प्रत्यक्ष दिखाई देते हैं। हालांकि जंगल में गश्त करते हुए वन कर्मचारियों को बाघ कई बार दिखाई देता है।खिवनी अभयारण्य में बाघिन मीरा ने तीन शावक को जन्म दिया देवास। जिले में खिवनी वन्य प्राणी अभयारण्य से खुशखबरी आई है। अभयारण्य में बाघिन मीरा ने तीन शावक को जन्म दिया है। तीनों शावक कैमरे में कैद हुए हैं। इससे बाघिन मीरा व बाघ युवराज का कुनबा बढ़ गया है। यह अभयारण्य के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभयारण्य में लगे ट्रैप कैमरे में तीन नन्हें शावक शिकार खाते दिखाई दे रहे हैं। मीरा कई महीनों से काफी सतर्क थी, यानी वह लगातार शावकों की सुरक्षा के लिए पल-पल निगरानी कर रही है। अब शावक शिकार खाने लगे हैं। हाल में ही अभयारण्य प्रबंधन को उस समय खुश खबरी मिली जब पानी के एक स्त्रोत के पास बाघिन दिन में शावकों के साथ दिखाई दी। इसके बाद रात के समय बाघ और बाघिन तीनों शावकों के साथ जल स्त्रोत पर ट्रेप कैमरे में दिखाई दिए। अभयारण्य अधीक्षक विकास माहोरे ने बताया कि अभयारण्य में 6 बाघों की उपस्थिति पूर्व से है और अब नए मेहमानों के आने के बाद प्रबंधन इनकी विशेष रूप से निगरानी कर रहा है। तीनों शावक स्वस्थ हैं और बाघिन के साथ ही अभयारण्य में विचरण कर रहे हैं। लगातार बाघिन के साथ रहने और ट्रेप कैमरों में काफी करीब नहीं आने के चलते प्रबंधन को अभी तक तीनों शावकों के लिंग का पता नहीं चला है। जिले के अंतिम छोर पर स्थित 134.77 वर्ग किलोमीटर में फैले अभयारण्य में भारत के राष्ट्रीय पशु एवं टाइगर स्टेट के घोतक बाघ का प्राकृतिक आवास है। यहां तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, लोमड़ी, चीतल, नीलगाय, चौसिंगा, जंगली सुअर जैसे कई वन्यप्राणी प्राकृतिक आवास में रह रहे हैं। अभयारण्य अधीक्षक विकास माहोरे ने बताया कि वर्ष 1955 में जारी प्रथम अधिसूचना के अनुसार यह मध्य प्रदेश का प्रथम अधिसूचित अभयारण्य है। ग्रीष्म ऋतु चल रही है, ऐसे में वन्यप्राणी भी गर्मी से राहत ढूंढ रहे हैं। रविवार को खिवनी अभ्यारण में बाघ गर्मी में रास्ते पर नजर आया तथा निर्भीक होकर बैठा रहा। अधीक्षक विकास माहोरे और उनके अमले को गश्ती के दौरान जंगल में यह नजारा दिखाई दिया। वन क्षेत्र बड़ा होने एवं पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आने वाले पर्यटकों को कभी-कभी ही जंगल में बाघ प्रत्यक्ष दिखाई देते हैं। हालांकि जंगल में गश्त करते हुए वन कर्मचारियों को बाघ कई बार दिखाई देता है।

