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1 Mar 2026, Sun

ठंड में ठिठुरते किसान, यूरिया टोकन के लिए सोनकच्छ आने को मजबूरई-टोकन व्यवस्था अब तक शुरू नहीं, यूरिया की जरूरत में किसान बेहाल

सोनकच्छ।“घर बैठे सुविधा” और “डिजिटल पारदर्शिता” जैसे बड़े-बड़े नारों के साथ प्रचारित ई-टोकन उर्वरक व्यवस्था सोनकच्छ में अभी तक ज़मीन पर उतर नहीं पाई है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें इन दिनों यूरिया खाद की सबसे अधिक जरूरत है। कड़ाके की ठंड के बीच आसपास के ग्रामीण इलाकों से किसान सुबह-सुबह सोनकच्छ पहुंचकर यूरिया एवं टोकन के लिए भटकते नजर आ रहे हैं।सुबह की ठिठुरन भरी ठंड में किसान लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि सोनकच्छ में ई-टोकन व्यवस्था शुरू नहीं होने से उन्हें मजबूरी में तड़के घर से निकलकर टोकन लेने आना पड़ रहा है, ताकि समय पर यूरिया खाद मिल सके। रबी फसलों के लिए इस समय यूरिया अत्यंत आवश्यक है, लेकिन व्यवस्था की खामियों ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।किसानों का साफ कहना है कि जिस व्यवस्था को “घर बैठे सुविधा” बताया गया था, वह अब ठंड में ठिठुरते हुए दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी बन गई है। सवाल उठ रहे हैं कि बिना जमीनी तैयारी के लागू की गई डिजिटल व्यवस्था का बोझ आखिर यूरिया के लिए भटकते किसान ही क्यों उठाएं?किसानों की सुविधा और पारदर्शिता के नाम पर शुरू की गई यह ई-टोकन प्रणाली फिलहाल अव्यवस्था की तस्वीर पेश कर रही है। न तो पहले से यूरिया वितरण के लिए सहायता केंद्र बनाए गए और न ही किसानों को स्पष्ट जानकारी दी गई। नतीजा यह है कि ठंड, समय और आर्थिक नुकसान—तीनों का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग मैदानी स्तर पर तत्काल सहायता केंद्र स्थापित करे, ई-टोकन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करे और यूरिया खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करे, ताकि ठंड में ठिठुरते किसानों को राहत मिल सके।इस संबंध में कृषि विभाग के टी. आर परिहार से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि ई-टोकन व्यवस्था शुरू करने की तैयारी चल रही है और सोनकच्छ क्षेत्र में 15 जनवरी तक ई-टोकन व्यवस्था शुरू हो जाएगी।अब सवाल यह है कि क्या तब तक यूरिया के लिए परेशान किसानों को कोई वैकल्पिक राहत मिलेगी, या उन्हें इसी तरह ठंड में लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ेगा।