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1 Mar 2026, Sun

तिब्बती बाजारों से खरीदारी करें, चीनी सामान का बहिष्कार करें : तोमरभारत-तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय संयोजक पहुंचे देवास, मैत्री का दिया संदेश

देवास। भारत तिब्बत समन्वय संघ (बीटीएसएस) के केंद्रीय संयोजक हेमेंद्र प्रताप सिंह तोमर देवास पहुंचे, जहां उन्होंने प्रांतीय पदाधिकारियों के साथ तिब्बत से आए व्यापारियों से मुलाकात कर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और तिब्बत का रिश्ता पारंभ से ही आत्मीय रहा है और भारत तिब्बत भाई-भाई है, न कि भारत-चीन भाई-भाई। तिब्बत हमेशा भारत के साथ खड़ रहा है। भारत को अपना गुरु मानता है। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर भारत की सीमा में स्थित है और इसी पवित्र यात्रा को सरल व सुगम बनाने के उद्देश्य से पांच वर्ष पूर्व भारत तिब्बत समन्वय संघ की स्थापना की गई थी। वर्तमान में संघ ने प्रदेशभर में अपनी इकाइयों का विस्तार कर लिया है।उन्होंने कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य कैलाश मानसरोवर पर्वत और तिब्बत को चीन के नियंत्रण से मुक्त करवाना है। उन्होंने आरएसएस के चौथे सरसंघचालक स्व. प्रो. रजू भैया और तिब्बती धर्मगुरुओं को संयुक्त सोच का भी उल्लेख किया। तोमर ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे लंबे संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी तरह भोलेनाथ की कृपा से कैलाश मानसरोवर को स्थिति भी शीघ्र सुधरेगी। उन्होंने वर्ष वर्ष 1950 के बाद की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय चीन की नीतियों के देश ठीक से नहीं समझ पाया, जिसका परिणाम धार्मिक स्थलों पर कब्जे के रूप में सामने आया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे तिब्बती बाजारों से गर्म कपड़े खरीदें, चीन में बने सामानों का बहिष्कार करें और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएं। कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि अब समय आ गया है के चीन को आर्थिक रूप से कमजोर किया जाए। संगठन पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय एवं प्रांत पदाधिकारी से टेकरी स्थित मां चामुंडा मंदिर में कोरोना काल से अस्थाई रूप से मंदिर के अंदर से दर्शन बंद कर रखे हैं, जिसको लेकर ज्ञापन दिया था। इस संबंध में भी चर्चा की। यदि प्रशासन नहीं सुनता है तो आगे की रूपरेखा पर विचार विमर्श किया। आभार नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र चावड़ा ने माना। संचालन जयदेव वर्मा ने किया। उक्त जानकारी विनोद जैन ने दी। कार्यक्रम के अंत में उपस्थितजन ने कैलाश मानसरोवर की की मुक्ति के लिए संकल्प लिया और भोलेनाथ से इसे चीन के नियंत्रण से मुक्त करवाने की प्रार्थना की गई।