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1 Mar 2026, Sun

नालियों का गंदा पानी कालीसिंध नदी में, वही पानी नलों में सोनकच्छ

सोनकच्छ। में भी हो सकती है इंदौर जैसी त्रासदी यह खबर सिर्फ सूचना नहीं, बल्कि प्रशासन की आंख खोलने वाली चेतावनी है। नगर के 18 हजार से अधिक नागरिक आज खुलेआम गंजपुरा गांव की गंदी नालियों का पानी पीने को मजबूर की जा रही है। समीपस्थ ग्राम गंजपुरा का दूषित पानी वर्षों से पिपलेश्वर मंदिर के सामने स्थित घाट पर सीधे नदी में मिल रहा है और यही पानी आगे चलकर नगर की पेयजल आपूर्ति बन रहा है।इंदौर में दूषित पानी का मुद्दा जब पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, उसी बीच सोनकच्छ की जीवनदायिनी मानी जाने वाली कालीसिंध नदी के शुद्धिकरण की मांग एक बार फिर ज़ोर पकड़ने लगी है। नगरवासियों का कहना है कि आज इंदौर की स्थिति चेतावनी है—और सोनकच्छ अगर अभी नहीं जागा, तो कल हालात और भयावह होंगे।स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कालीसिंध नदी में दूषित पानी का प्रवेश लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। पहले भी नगरवासियों ने नदी में मिल रहे गंदे नालों, अपशिष्ट और बिना शुद्धिकरण छोड़े जा रहे पानी पर आवाज़ उठाई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सोनकच्छ में कालीसिंध नदी में मिल रहा गंजपुरा का गंदा पानी, जनता के स्वास्थ्य पर खतरा सोनकच्छ की जीवनदायिनी मानी जाने वाली कालीसिंध नदी लगातार प्रदूषित हो रही है। ग्राम पंचायत सांवेर के अंतर्गत ग्राम गंजपुरा से निकलने वाला नाले का गंदा और बदबूदार पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे नगर की लगभग 100 प्रतिशत आबादी के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।नई जगह से मोड़ा गया नाला, नदी में काला पानीस्थानीय नागरिकों के अनुसार, पहले गंजपुरा गांव के भीतर से निकाले गए गंदे पानी को अब नई जगह से मोड़कर सीधे नदी में प्रवाहित किया गया है। हालात यह हैं कि—पिपलेश्वर मंदिर के सामने नदी में नाले का पानी मिल रहा है,नगर परिषद की पानी की टंकी के ठीक सामने गंदा पानी गिर रहा है, जहाँ से नगर को पेयजल की आपूर्ति होती है,डाक बंगला (रेस्ट हाउस) चौराहे से बहता गंदा पानी छतरी घाट के पास नदी में मिल रहा है।इन स्थानों पर नदी का पानी काला पड़ चुका है और तेज दुर्गंध भी महसूस की जा रही है।बीमारियों का बढ़ता खतरानगरवासियों का कहना है कि इसी नदी के पानी का उपयोग पीने, नहाने और अन्य घरेलू कार्यों में किया जा रहा है। इसके चलते मलेरिया, टाइफाइड, दाद-खाज, खुजली सहित अन्य जलजनित बीमारियों के मामले बढ़ने की आशंका बनी हुई है।6 साल से शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहींस्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर पिछले छह वर्षों से प्रशासन को बार-बार अवगत कराया जा रहा है। कई बार लिखित शिकायतें, वीडियो प्रमाण और अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांगनगरवासियों की मांग है कि—गंजपुरा के नाले का गंदा पानी तत्काल रोका जाए,नदी में गिरने वाले सभी नालों का शुद्धिकरण (ट्रीटमेंट) किया जाए,जल गुणवत्ता की नियमित जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो।जल ही जीवन है—यदि कालीसिंध को नहीं बचाया गया, तो आने वाले समय में सोनकच्छ को गंभीर जल और स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।