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1 Mar 2026, Sun

श्रीकृष्ण जन्म की कथा पृथ्वी पर धर्म की पुनस्र्थापना और कंस जैसे अत्याचारियों के अंत का प्रतीक है- शान्ति स्वरूपानंद गिरिजी महाराज

देवास। सिविल लाइन गार्डन में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस मंगलवार को प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण जन्मोत्सव उत्साह के साथ भक्तों ने मनाया। चौथे दिन की कथा शुरू होने के पूर्व मुख्य यजमान श्रीमती पुष्पा विपिन कुमावत, (सेवानिवृत्त नगर निगम इंजीनियर), आशीष कुमावत, गोवर्धन लाल कुमावत, प्रियंका कुमावत, सुरेश व्यास ने व्यासपीठ की पूजा कर आरती की। तत्पश्चात महामण्डलेश्वर 1008 श्री स्वामी शान्ति स्वरूपानंद गिरिजी महाराज की कथा शुरू हुई। व्यासपीठ से स्वामी जी ने कहा कि भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ मथुरा के कारागार में भाद्रपद मास की अष्टमी की मध्यरात्रि को कंस की बहन देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होता है, जिसमें वे चतुर्भुज रूप में प्रकट होकर वसुदेव को दिव्य ज्ञान देते हैं, फिर वसुदेव उन्हें गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचाते हैं और वहां यशोदा के गर्भ से जन्मीं माया रूपी कन्या को लेकर लौटते हैं, जिससे कंस के अत्याचारों का अंत होता है और भक्तों में आनंद छा जाता है। इस शुभ अवसर पर कथा पण्डाल को फूलों व गुब्बारों से आकर्षक रूप से सजाया गया। सुमधुर भजनों के बीच श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ। श्रीकृष्ण जी का जन्म होते ही पूरा परिसर नन्द के आनन्द भयो, जय कन्हैयालाल की से गूंज उठा। इस अवसर पर महाराज श्री ने भगवान श्रीराम के जन्म की कथा का व्याख्यान भी किया। भक्तों के बीच चॉकलेट लुटाई गई व मिठाई बांटी गई। गुरू महाराज ने आगे कहा कि कंस को आकाशवाणी से पता चला था कि देवकी के गर्भ से जन्मा आठवां बालक उसका वध करेगा, इसलिए उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। जिस रात श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस रात कारागार में दिव्य प्रकाश फैल गया। भगवान शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए और वसुदेव-देवकी को अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन कराया। भगवान ने वसुदेव को गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचाने और वहां से कन्या को लाने का निर्देश दिया। जेल के पहरेदार और ताले अपने आप खुल गए, और यमुना नदी में आई बाढ़ भी श्रीकृष्ण के चरणों को स्पर्श करके शांत हो गई। गोकुल में नंद बाबा के घर कन्या का जन्म हुआ था, जिसे वसुदेव श्रीकृष्ण के स्थान पर रखकर ले आए। सुबह होते ही नंद घर में बाल गोपाल के जन्म की खबर से नंदोत्सव मनाया गया, जिसमें माखन-मिश्री लुटाकर और बधाई गीत गाकर भक्तों ने आनंद मनाया। यह प्रसंग पृथ्वी पर धर्म की पुनस्र्थापना और कंस जैसे अत्याचारियों के अंत का प्रतीक है, जिसे भागवत कथा में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। शाम को आरती मुख्य रूप से पधारे चामुण्डा सेवा समिति से रामेश्वर जलोदिया, नरेन्द्र मिश्रा उम्मेदसिंह राठौड, क्षत्रिय महासभा से किशोर सिंह राजपूत, गंगासिंह सोलंकी, गुणपाल सिंह पवार, डॉ. राजेन्द्र सिंह ठाकुर, शैलेन्द्र सिंह पंवार, भजन गायक द्वारका मंत्री आदि गणमान्यजनों ने की। कथा में आज पांचवे दिवस गिरिराज महोत्सव मनाया जाकर छप्पन भोग लगाया जाएगा। कथा 9 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक चलेगी।