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28 Jul 2026, Tue

हमेशा याद रहेंगे मन्नूलाल जी के धार्मिक कार्य

देवास । प्रसिद्ध समाजसेवी सेठ मन्नूलाल जी गर्ग का निधन शहर की अपूरणीय क्षति है । वे बड़े कालोनाइजर थे, समृद्ध थे, लेकिन उन्होंने जीवन का उत्तरार्ध पूर्ण रूप से धर्म, समाज एवं परमार्थ को समर्पित कर दिया । उनके द्वारा स्थापित धार्मिक, सामाजिक एवं परमार्थकारी कार्य हमेशा याद रखे जायेंगे । अविस्मरणीय रहेंगे । अव्वल तो मन्नूलाल जी द्वारा सेठ मिश्रीलाल नगर में भव्य मंदिर का निर्माण कर पौराणिक मान्यताओं के अनुरूप मैया यशोदा, नंद बाबा की पुत्री आदिशक्ति, योगमाया मां कैलादेवी की प्राण प्रतिष्ठा करना है । मंदिर प्रांगण में परम रामभक्त हनुमान जी एवं मां दुर्गा की विशाल प्रतिमाएं दर्शनार्थियों का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींचती है । कैलामैया के साथ मंदिर परिसर में भगवान शिव, श्री गणेश सहित अन्य देवी देवता प्रतिष्ठित है । भक्तजन जिनकी पूजा, आराधना एवं परिक्रमा कर दिव्य शांति का अनुभव करते है । मन्नूलाल जी द्वारा श्री कैलादेवी मंदिर के विशाल बाहरी प्रांगण में चैत्र नवरात्रि महोत्सव के दौरान समाजवाद के जनक डॉ राममनोहर लोहिया की प्रेरणा अनुरूप स्थापित श्री रामायण मेला प्रसिद्ध है । जो धर्म के साथ साथ भक्तजनों के मन में उत्सवप्रियता, भक्ति ओर आनंद की मिठास भी घोलता है । बीते वर्षों में श्री रामायण मेले में संपादित भव्य धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजनों, अनुष्ठानों एवं देश के प्रमुख संतों के शुभ आगमनों से इसकी राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति स्थापित है । वात्सल्यमयी दीदी मां साध्वी ऋतुम्भरा जी, उनकी शिष्या पुज्य सत्यप्रिया जी, पूज्य शंकराचार्य दिव्यानंद जी तीर्थ, पूज्य संत श्री आसाराम जी, प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय कथावाचक, भागवत मर्मज्ञ पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी, पूज्य कनकेश्वरी देवी, पूज्य भास्करानंद जी महाराज सहित अनेक विद्वत् संतो के श्रीमुख से रामायण मेले में श्रीमद भगवद कथा, श्री रामकथा की ज्ञानगंगा, सत्संग की पुण्य धारा प्रवाहित हुई । देश के सुदूर स्थलों, तीर्थ स्थलों से श्री कैलादेवी मंदिर पर संतजनों का शुभ आगमन, धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रम वर्षभर होता रहता है । जिनकी सम्पूर्ण आत्मीय सेवा, व्यवस्था मंदिर समिति की ओर से की जाती है । बीते वर्षों में राजनैतिक विद्वेष के चलते कैला मैया के धार्मिक प्रांगण में सेठ मन्नूलाल जी द्वारा स्थापित रामायण मेले को आघात भी पहुंचाया गया । स्थानीय नेताओं द्वारा जलन, ईर्ष्या के वशीभूत धर्म पर चोंट पहुंचाते हुए रामायण मेले पर किए गए आघात का मन्नूलाल जी ने डटकर मुकाबला किया । उन्होंने यहां तक कहा कि हम नहीं तो आप अथवा नगर निगम शासन, प्रशासन चैत्र नवरात्रि में कैलादेवी मंदिर प्रांगण में रामायण मेला आयोजित करे । हम हर प्रकार से सहयोग करेंगे । सर्वविदित है, शहर ही नहीं प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर धर्मावलंबियों द्वारा रामायण मेले पर दुराग्रही, स्वार्थी नेताओं की तोड़फोड़, आघात की निंदा, भर्त्सना की गई । गौरतलब है कि अपनी जिद, हठधर्मिता एवं सत्ता के नशे में चूर होकर रामायण मेले पर चोंट पंहुचाने वाले एक एक कर गुम होते, पहचान खोते गए, लेकिन कैलादेवी मंदिर पर छोटे-बडे स्वरूप में चैत्र नवरात्रि के दौरान मन्नूलाल जी द्वारा स्थापित रामायण मेला आज भी लगता है । हजारों की संख्या में दर्शनार्थी धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजनों एवं मां के दर्शनार्थ एकत्रित होते है । मन्नूलाल जी के मीडिया अर्थात प्रेस जगत से भी आत्मीय संबंध थे । कैलादेवी मंदिर पर चैत्र नवरात्रि महोत्सव, रामायण मेला हो या अन्य बड़े धार्मिक आयोजन हो । वे शहर के समस्त पत्रकारों को ससम्मान आमंत्रित कर उन्हें जानकारी जरूर देते थे । विगत 27 अप्रैल को भरा पूरा समृद्ध परिवार छोड़कर उनका देवलोक गमन हो गया । हर्ष का विषय है कि जीते जी उनके सुपुत्र श्री दीपक गर्ग ने ऊर्जा, समर्पण, समझबूझ के साथ कामकाज एवं कैलादेवी मंदिर की सेवा, व्यवस्था की जिम्मेदारी का बखूबी संभाल ली । बीते माह में ही भव्यता की वजह से शहर में चर्चा का विषय बनी अपने पौते का विवाह भी उन्होंने देख लिया । शहर में अनेक धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठनों को संभाल प्रदान करने वाले, धर्म, कर्म में रत रहने वाले मन्नूलाल जी गर्ग के विगत 27 जून को बैकुंठवासी होने के उपरांत से ही सनातनी धर्मावलंबियों, कैला मैया के भक्तों के मुख से शोक संवेदना के स्वर निरन्तर सुनाई दे रहे है । इन शोकाकुल स्वरों में यह स्पष्ट तौर पर कहा जा रहा है कि शरीर से वे भले ही वे हमारे बीच नहीं रहे हो, लेकिन जीवन पर्यंत किए गए धार्मिक सद्कार्यों की बदौलत ब्रम्हलीन मन्नूलाल जी प्रेरणास्त्रोत बनकर सदैव जीवित रहेंगे…।