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28 Feb 2026, Sat

श्रीमद् भागवत प्रभु ज्ञान गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य आत्माएं तार जाती है- भागवत आचार्य पंडित राकेश शर्माकलश यात्रा के साथ चाणक्यपुरी में भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

देवास। चाणक्यपुरी में 16 से 22 जनवरी तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया है। कथा शुभारंभ पूर्व राधा कृष्ण मंदिर से बैंड बाजों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। भारत माता चौराहा राम मंदिर कॉलोनी के प्रमुख मार्गो से होते हुए कलश यात्रा का कथा स्थल पर समापन हुआ। व्यास पीठ से कथा का वाचन करते हुए भागवताचार्य पंडित राकेश शर्मा ने कहां की राधा रानी के जन्म के बारे में कहा जाता है कि राधा जी कमल पुष्प से प्रकट हुई थी. राधा जी जब प्रकट हुई तो उन्होंने संसार के सामने आँखे नहीं खोली। नंद जी के अंगना में गई तब भगवान श्री कृष्ण के सामने अपनी आंखें खोल दी. तो कृष्ण प्रिया हो गई। राधा जी ने आंखें इसलिए नहीं खोली क्योंकि वह सिर्फ श्री कृष्ण को ही देखना चाहती थी. संसार को नहीं. कथा का जो सार है वह राधाजी का सार है। आगे कहा कि रामचरितमानस में भी कथा का सार समझाते हुए तुलसीदास जी कहते हैं कमल रूपी चरणों का वर्णन करता हूं, दया रूपी जो समुद्र है उस भगवान का व भगवती राधा रानी को वंदन करता हूं, जो अज्ञानता का नाश करने वाले हैं. श्रीमद् भागवत रूपी ज्ञान गंगा मे डुबकी लगाने से मनुष्य आत्माएं से तर जाती है. मीठा फल उसी के भाग्य में होता है जो उसका स्वाद जानता हो। श्रीमद् भागवत की महिमा का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि. भगवान की कृपा से ही कथा करवाने का व श्रवण करने का अवसर मिलता है. राधा तो केवल सार है आत्मा रूपी शरीर को धारण कर रखा है. और यदि अपने जीवन में जो कोई कृष्ण नाम, राधा नाम, शिव नाम, गोविंद नाम, माधव का नाम जो जैसा भजन कर लेते हैं उनकी आत्मा तर जाती है. आयोजक मंडल के छोटेलाल मंगरोला, राजा प्रजापति, सचिन प्रजापति गौ सेवा मित्र मंडल ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना कर महाआरती की. सैकड़ो धर्म प्रेमी ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ है।