देवास। शहर के मोती बंगला स्थित वरिष्ठ कवि दिलीप मांडलिक जी के निवास पर संस्कृति साहित्य रचनालय “संसार” संस्था द्वारा एक गरिमामयी काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के अनेक वरिष्ठ एवं युवा कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में मोइन खान मोइन ने देशभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हुए कहा— “धूप में तपते हैं बारिश में नहाते हैं, तब कहीं मुल्क की तस्वीर बनाते हैं।”हास्य और मालवी रंग के कवि विजय जोशी ने अपनी चुटीली प्रस्तुति से श्रोताओं को खूब आनंदित किया— “माया तेरो तीन नाम,लालू, लालयो, लाल जी राम।”युवा शायर देव निरंजन ने जीवन की गहराइयों को व्यक्त करते हुए कहा— “एक रेगिस्तान है ये ज़िन्दगी, इसके बिल्कुल बीच में तालाब कर।”कवि राजेन्द्र तिवारी “नीलम” ने वर्तमान समय की संवेदनाओं को स्वर दिया— “तुम समय को थाम कर सबको संभालो, इंसानियत को आज कोई डस गया है।”राधेश्याम पांचाल जी ने प्रेम और भावनाओं से भरपूर पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं— “उनके आने की महक से प्राण मेरे खो गए हैं, चेतना के गात ढीले हो गए हैं।” कवि ॐ यादव ने जोशीले अंदाज में कहा— “अब वक्त आ गया है ऐलान कीजिए, तिरंगा उठाइये या लाहौर जाइये।” आयोजक एवं वरिष्ठ कवि दिलीप मांडलिक जी ने समय की संवेदनाओं को उकेरते हुए कहा— “थोड़ी धूप दिखाओ इन्हें नए वक़्त की, स्मृतियां अब तक गीली क्यों हैं।”कवि त्रिभुवन शर्मा ने जीवन के महत्व को सरल शब्दों में व्यक्त किया— “ये ज़िन्दगी ईनाम है, इस ज़िन्दगी के कई नाम हैं।”वरिष्ठ कवि विनोद मंडलोई जी ने प्रेमरस से भरपूर रचना प्रस्तुत की— “तेरे ही रूप नयन में तेरे ही गीत बयन में, मैं तुझे भुलाऊँ कैसे तू बसा हुआ है मन में।” कार्यक्रम का संचालन त्रिभुवन शर्मा ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि अंत में आभार प्रदर्शन दिलीप मांडलिक जी द्वारा किया गया।

