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29 Jul 2026, Wed

महाराष्ट्र समाज धर्मशाला भागवत कथा के दूसरे दिन शिव-पार्वती विवाह की झांकी ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

देवास। नगर के मुक्ति मार्ग स्थित महाराष्ट्र समाज धर्मशाला में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण महोत्सव के द्वितीय दिवस पर पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा। कथा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। पं. मनीष पाठक एवं अन्य विप्रजनों ने विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इसके पश्चात भागवताचार्य नगरपुरोहित पं. डॉ. दीपेश पाठक ने श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं रोचक वर्णन किया। कथाव्यास पं. डॉ. दीपेश पाठक ने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल एक दैवीय घटना नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समर्पण और अटूट प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया। उनकी निष्ठा, धैर्य और अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची साधना, दृढ़ संकल्प और ईश्वर के प्रति समर्पण से जीवन के सभी लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। कथाव्यास ने शिव बारात का जीवंत चित्रण करते हुए बताया कि जब भगवान शिव अपनी अनोखी बारात लेकर हिमालय के द्वार पहुंचे तो उसमें देवताओं के साथ-साथ भूत, प्रेत, गण और योगी भी सम्मिलित थे। शिवजी का अद्भुत स्वरूप देखकर माता मैना सहित समस्त जनसमुदाय आश्चर्यचकित हो गया। बाद में भगवान शिव ने अपना दिव्य एवं सौम्य रूप प्रकट कर सभी को आनंदित किया। शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। भागवताचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिव और पार्वती का दांपत्य जीवन समाज को आदर्श पारिवारिक मूल्यों, आपसी सम्मान, त्याग और समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जहां शिव वैराग्य और ज्ञान के प्रतीक हैं, वहीं माता पार्वती शक्ति, करुणा और मातृत्व की प्रतिमूर्ति हैं। दोनों का मिलन सृष्टि में संतुलन और कल्याण का आधार है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति रस से ओतप्रोत भजनों का आनंद लिया तथा कथा के विभिन्न प्रसंगों पर भाव-विभोर होकर भगवान के जयकारे लगाए। इस अवसर पर यजमान परीक्षित सीमा-महेंद्र दुबे, शांतनु उपाध्याय, अनिमेष जोशी एवं परिवारजनों द्वारा कथा की पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न की गई। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी, माताएं, बहनें एवं युवा उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने कथा के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर धर्म, संस्कृति और संस्कारों के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। इस अवसर पर औदुंबर वरिष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष महेंद्र उपाध्याय एवं संयोजक जयंत शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि ऐसी धार्मिक कथाएं समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना का संचार करती हैं।