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5 Jun 2026, Fri

विहाररत जैन संतों की सुरक्षा को लेकर जैन समाज ने उठाई आवाज – रीवा हादसे की उच्चस्तरीय जांच और राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने की मांग

देवास। रीवा में विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुखद घटना जिसमें एक तेज रफ्तार कार ने विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को कुचल दिया जिसमें दो हादसे में दो साध्वियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य साध्वी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे को लेकर जैन समाज में गहरा आक्रोश एवं शोक व्याप्त है। समाजजनों ने इस घटना को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने तथा विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। समस्त जैन समाज की ओर से जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री एवं भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपे गए। ज्ञापन में कहा गया कि जैन साधु-संत पूर्णत: अहिंसक, निहत्थे एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो समाज को शांति, संयम और अहिंसा का संदेश देते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं और हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। ज्ञापन में रीवा घटना की एसआईटी अथवा न्यायिक जांच कराने, घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार से राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने की मांग करते हुए पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन, सुरक्षा एसओपी एवं संवेदनशील मार्गों के लिए विशेष प्रावधान तैयार करने की आवश्यकता बताई गई है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि संत आत्मरक्षा नहीं करते तथा किसी प्रकार के सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते, इसलिए संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए।