देवास। जिले के ग्राम भागसरा, तहसील सोनकच्छ के कृषक बंशीगिरी गोस्वामी एवं उनकी पत्नी गुड्डी बाई गिरी गोस्वामी ने निजी कृषि भूमि पर कथित अतिक्रमण, खेत की सीमांकन व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने, रास्ता अवरुद्ध करने तथा प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने की शिकायत को लेकर मंगलवार को पुन: जनसुनवाई के दौरान कलेक्ट्रेट में आवेदन देकर न्याय की मांग की। उनका कहना है कि वे चार से पांच बार जनसुनवाई में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। शिकायत के अनुसार, ग्राम भागसरा स्थित उनकी कृषि भूमि के सर्वे नंबर 29/1/2, 29/2, 29/1/1, 31/1 एवं 31/2 कुल रकबा 0.87 हेक्टेयर पर पड़ोसी कृषक द्वारा कथित रूप से पहले से लगे लकड़ी के खंभे तोडक़र भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। आवेदक का कहना है कि वे देवास में निवास करते हैं और गांव में समय-समय पर ही पहुंच पाते हैं, जिसका फायदा उठाकर यह कृत्य किया गया। एक अन्य आवेदन में बंशीगिरी गोस्वामी ने बताया कि खेत तक पहुंचने वाले रास्ते को खुलवाने के लिए तहसील कार्यालय सोनकच्छ में आवेदन दिया गया था। इस पर तहसीलदार के निर्देशानुसार 17 मई 2026 को पटवारी अंकित शर्मा एवं चौकीदार ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें और उनके पुत्र को गाली-गलौज कर रास्ते से भगा दिया, जबकि पटवारी एवं चौकीदार को वहां से निकलने दिया गया। बाद में उन्हें डायल-112 की सहायता से वहां से निकलना पड़ा। इसके अलावा, नवीन आवेदन में बंशीगिरी गोस्वामी ने बताया कि 21 जून 2026 को वे अपनी कृषि भूमि पर ट्रैक्टर से जुताई कराने पहुंचे थे, लेकिन आरोप है कि संबंधित लोगों ने उनका ट्रैक्टर रोक दिया और खेत तक जाने का रास्ता अवरुद्ध कर दिया। इसके कारण वे कृषि कार्य पूरा नहीं कर सके, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस संबंध में उन्होंने प्रशासन से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आवेदकों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भूमि पर कब्जे के प्रयास, सीमांकन के लिए लगाए गए खंभे तोड़े जाने, रास्ता अवरुद्ध करने तथा कृषि कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोपों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उनकी कृषि भूमि तक पहुंचने का वैधानिक रास्ता खुलवाकर उन्हें न्याय दिलाने की भी मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार जनसुनवाई में आवेदन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से उन्हें बार-बार प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर मामले का स्थायी निराकरण करने की मांग की है।
