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5 Jun 2026, Fri

पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट : तीन मजदूरों की मौत, 25 घायल, शवों के टुकड़े 25 फीट दूर तक बिखरे

देवास। जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह आगरा-मुंबई हाईवे किनारे स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। धमाका इतना तेज था कि मजदूरों के शरीर के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। हादसे में फैक्ट्री मजदूर धीरज, सनी और सुमित की मौत हो गई, जबकि 25 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें 13 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को देवास और इंदौर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर मालिक अनिल मालवीय को हिरासत में ले लिया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। विस्फोट के बाद फैक्ट्री परिसर में चारों ओर चीख-पुकार मच गई। बारूद से झुलसे मजदूर दर्द से तड़प रहे थे। कई घायल बिना कपड़ों के तपती जमीन पर पड़े थे और उनकी चमड़ी तक झुलस चुकी थी। साथी मजदूर ही घायलों को कंधों पर उठाकर हाईवे तक लाए, क्योंकि हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस मौके तक नहीं पहुंच सकी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह करीब 11 बजे जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद फैक्ट्री से धुएं का गुबार उठने लगा। टीन शेड हवा में उड़ते दिखाई दिए और विस्फोट वाली इमारत पूरी तरह ढह गई। बिहार निवासी मजदूर शशिकुमार पासवान ने बताया कि वे पिछले ढाई महीने से फैक्ट्री में काम कर रहे थे। हादसे के समय वे दूसरे ब्लॉक में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि धमाके के बाद बाहर निकलकर देखा तो कई लोग बुरी तरह झुलस चुके थे और सभी उन्हें बचाने में जुट गए। ग्रामीणों के मुताबिक धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। टोंककलां और कलमा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। कई घरों में धमाके से बर्तन तक हिल गए।फैक्ट्री में रोज काम करते थे 500 से ज्यादा मजदूर जानकारी के अनुसार फैक्ट्री परिसर में छह से अधिक ब्लॉक बने थे। जिस हिस्से में विस्फोट हुआ, वहां केमिकल से बारूद तैयार किया जाता था। पास के ब्लॉकों में पटाखों की पैकिंग और निर्माण का काम चलता था। हादसे के बाद परिसर में अधजले पटाखे, पैकिंग सामग्री, मजदूरों की चप्पलें, पानी की बोतलें और महिलाओं के उपयोग का सामान बिखरा मिला। मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री में रोजाना 500 से 600 लोग काम करते थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। पुरुष मजदूरों को प्रतिदिन 400 रुपए और महिलाओं को 250 रुपए दिहाड़ी दी जाती थी।ग्रामीणों ने प्रशासन को घेरा हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर जमा हो गए और प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव किया। लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी और शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। ऋतुराज सिंह ने बताया कि कुल 28 लोग घायल हुए थे, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। घायलों का इलाज देवास और इंदौर के अस्पतालों में जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री को 23 दिसंबर को लाइसेंस जारी किया गया था, जबकि 6 मई को उसका नवीनीकरण किया गया था। संचालकों के पास पटाखा निर्माण और विक्रय के दो अलग-अलग लाइसेंस थे। मामले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं तथा अब तक चार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।