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20 Apr 2026, Mon

राम-सीता विवाह पर हुई फूलों की वर्षा, मर्यादा, संयम और विनम्रता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत है रामकथा- पं.चतुर्वेदी

देवास। गंगानगर परशुराम वाटिका गार्डन, में चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ, परशुराम जी के चरित्र प्रसंग का बडे ही सुंदर तरीके से सारगर्भित प्रसंग श्रवण कराया। साथ ही राम जी विवाह भी धूमधाम से सम्पन्न हुआ। आयोजक सुरेश चंद्र व्यास सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री ने बताया कि प्रभु श्रीराम विवाह के साथ भक्तों ने पुष्पवर्षा कर जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पूरे पंडाल को आकर्षक रूप से सजाया गया और भक्तजन विवाह गीतों पर झूम उठे। पुष्प वर्षा, शंखनाद और भजन-कीर्तन के बीच राम-सीता विवाह उत्सव अत्यंत उल्लास और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। कथा के सातवें दिन राम जी का वनवास, केवट प्रसंग एवं भरत मिलाप का प्रसंग होगा। कथा की पूर्णाहुति 22 मार्च को होगी। पं. चतुर्वेदी ने व्यासपीठ से कहा कि राजा जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर में भगवान शिव के विशाल धनुष को कोई भी राजा उठा नहीं सका। अंतत: गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने सहज भाव से उस धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे वह धनुष भंग हो गया। इस दिव्य घटना के साथ ही माता सीता ने भगवान श्रीराम को अपने वर के रूप में स्वीकार किया। कथा के दौरान परशुराम जी का क्रोधपूर्ण आगमन और उनका तेजस्वी संवाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कथावाचक ने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता और धैर्य के साथ परशुराम जी के क्रोध को शांत किया। यह प्रसंग मर्यादा, संयम और विनम्रता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। व्यासपीठ की आरती महापौर दुर्गेश अग्रवाल, पूर्व महापौर सुभाष शर्मा, कल्याण भूतडा, आनंद पुरोहित इंदौर, रंजीत सिंह डंग, रविकांत मिश्रा, बीके तिवारी, रामचंद्र पटेल गौरखपुर, टीपी तिवारी, राजेन्द्र जायसवाल, मनोज चौबे, दिनेश मिश्रा, उमेश चतुर्वेदी सहित भक्तों ने की। व्यास पूजन महेश व्यास, जगदीश व्यास सुरेश व्यास ने किया। महाराज श्री ने कहा कि कथा का उद्देश्य समाज में धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रसार करना है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।